शुक्रवार, 30 जनवरी 2009

गुलजार की जय हो...

आजा आजा जिन्द शामियाने के तले..
आजा जरी वाले नीले आसमान के तले
जय हो! जय हो!
रत्ती रत्ती सच्ची मैने जान गंवाई है,
नच नच कोयलों पे रात बिताई है
अंखियों की नींद मैने फूंकों से उड़ा दी
गिन गिन तारे मैने उंगली जलाई है
आजा आजा .....
जय हो!
चख ले, चख ले
ये रात शहद है,
चख ले.. रख ले, हां दिल है
दिल आखरी हद है..रख ले
जय हो!
दिल से बड़ी कोई जीत नहीं,
कोई ईनाम नहीं, कोई हद नहीं,
कोई सौगात नहीं...
काला काला काजल तेरा कोई काला जादू है
नाजा आजा ..... जय हो! कब से हां कब से जो लब पे रुकी है॥
कह देकह दे, हां कह देअब आंख झुकी है, कह देऐसी ऐसी रोशन आंखेंरोशन दो दो हीरे हैं क्या?
आजा आजा ..... जय हो!

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